Uttarakhand

कोट ब्लॉक में मिली प्राचीन सुरंग, विशेषज्ञों की टीम करेगी अध्ययन

पौड़ी । कोट ब्लॉक के घने जंगलों में पुरातत्व विभाग की टीम को एक रहस्यमयी गुफा मिली है। कठिन रास्तों को पार कर टीम मौके तक पहुंची, जहां जांच में सामने आया कि गुफा मानव निर्मित हो सकती है। खास बात ये है कि पहली गुफा से करीब 200 मीटर दूर एक और गुफा भी मौजूद है, जिससे दोनों के आपस में जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल, सुरंग का रास्ता आगे जाकर मिट्टी और पत्थरों के कारण बंद मिला है, जिसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इन गुफाओं का इस्तेमाल प्राचीन समय में सैनिकों की ओर से दुश्मनों से बचने या छिपने के लिए किया जाता रहा होगा।
दरअसल, पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक क्षेत्र में एक प्राचीन सुरंग (गुफा) की खोज ने इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में नई उत्सुकता पैदा कर दी है। यह सुरंग गींठीछेड़ा झरने के नीचे दुर्गम इलाके में स्थित है, जहां क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई की टीम ने प्रभारी अधिकारी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट के नेतृत्व में पहुंचकर इसका प्रारंभिक निरीक्षण किया।
गुफा के भीतर प्रवेश के लिए पत्थरों को काटकर बनाई गई 6 सीढ़ियां मिली हैं, जो इसके मानव निर्मित होने की ओर स्पष्ट संकेत देती हैं। यह स्थान जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर है और वहां तक पहुंचने के लिए लगभग एक किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस गुफा का इस्तेमाल प्राचीन काल में बाहरी आक्रमणों और जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए आश्रय स्थल के रूप में किया जाता रहा होगा। गुफा के अंदर एक समय में लगभग 6 से 8 लोगों के ठहरने की पर्याप्त जगह मौजूद है। गुफा का प्रवेश द्वार खड़ी पहाड़ी पर करीब 20 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिससे वहां तक पहुंचना जोखिम भरा बना हुआ है।
इसके अलावा मुख्य गुफा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक अन्य सुरंग का मुहाना भी चिह्नित किया गया है। इस आधार पर संभावना जताई जा रही है कि दोनों सुरंगें आपस में जुड़ी हो सकती हैं, हालांकि इसकी पुष्टि विस्तृत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक उत्खनन के बाद ही संभव होगी।
प्रभारी अधिकारी, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने कहा कि सुरंग का प्रारंभिक निरीक्षण कर लिया गया है। इस स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए जल्द ही जिला प्रशासन के सहयोग से विशेषज्ञों की टीम के साथ विस्तृत अध्ययन एवं सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा।

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