Uttarakhand

गौवंशों को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ने वाले असामाजिक लोगों का बहिष्कार जरूरीः अंथवाल  

रुद्रप्रयाग,। गौवंश का उपयोग करने के बाद उन्हें सड़कों में मरने के लिए छोड़ने वाले पाप के साथ ही अपराध के भी भागी बन रहे हैं। ऐसे असामाजिक लोगों का समाज में बहिष्कार होना चाहिए। रात के समय शराब के नशे में गौवंशों को कुचलने वाले चालकों के खिलाफ भी ठोस कार्यवाही को लेकर कार्य योजना बनाई जा रही है। पहाड़ी इलाकों से गौवंशों को कैंटर व ट्रकों में छुपाकर शहरी इलाकों में पहुंचाने का प्रयास करने वालों पर पैनी नजर रखते हुए सबक सिखाया जा रहा है। अब तक इन मामलों में कठोर कार्यवाही अमल में लाई गई है।
रुद्रप्रयाग दौरे पर पहुंचे गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र अंथवाल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों में गौवंश का उपयोग करने के बाद उन्हें सड़कों में मरने के लिए छोड़ने वाले असामाजिक लोगों का समाज में सीधे तौर पर बहिष्कार होना चाहिए। ये लोग पाप के भागी बनने के साथ ही अपराध भी कर रहे हैं। इनके इस कृत्य से गौवंशों की बुरी दशा हो रही है। खुशी होती है कि नयी पीढ़ी इस बीड़ा को उठाने में आगे नजर आ रही है। गौ रक्षा विभाग रुद्रप्रयाग जनपद के भीतर सराहनीय कार्य कर रहा है। विभाग की टीम के सदस्य जहां सड़कों में निराश्रित गौवंश के घायल होने पर उनका ट्रीटमेंट कर रहे हैं, वहीं निराश्रित गौवंश शाला में सरंक्षण और सवंर्द्धन का कार्य भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि गौवंश संस्कृति की आत्मा है। इनका अनादर नहीं होना चाहिए। गौवंश को पहाड़ी इलाकों से  कैंटर व ट्रकों में छुपाकर शहरी इलाकों में पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिस पर गौ सेवकों के साथ ही पुलिस की भी पैनी नजर है। अगर किसी को भी इस प्रकार की कोई घटना दिखती है तो तुरंत गौ सेवकों और पुलिस को सूचना दें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में निराश्रित गौवंशों का संरक्षण और संवर्द्धन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनपद के भीतर पपड़ासू, रैंतोली और अगस्त्यमुनि में निराश्रित गौवंश शाला का संचालन किया जा रहा है, जिनमें 130 के करीब निराश्रित गौंवशों की देख-रेख की जा रही है। निराश्रित गौवंश शाला में दो दर्जन लोगों को रोजगार मिला है। जहां ग्रामीण इलाकों में घास काटने वाली महिलाओं को रोजगार मिला है, वहीं घास लेकर गौवंश शाला पहुंचाने वाले वाहन चालक को भी रोजगार मिला है। इसके अलावा निराश्रित गौवंश शाला में सेवकों को भी रखा गया है, जो हर दिन गौशाला में पहुंचकर निराश्रित पशुओं के लिए चारापत्ति, पानी के साथ ही इन्हें चरने भी लेकर जाते हैं। जिससे इनके पेट से प्लास्टिक गंदगी को साफ किया जा सके। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा विभाग से जुड़े युवा रुद्रप्रयाग जनपद में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। इस मौके पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आशीष रावत, ईओ नगर पंचायत निकिता भट्ट, गौ रक्षा विभाग के अध्यक्ष रोहित डिमरी, गौ सेवा आयोग के सदस्य धर्मवीर सिंह गुंसाई, पशु चिकित्सा अधिकारी दीपमणी गुप्ता, फार्मासिस्ट इन्द्रजीत, सनोज सहित अन्य मौजूद थे।
गौ माता के साथ ही भगवान नंदी के संरक्षण को लेकर भी गौ सेवा आयोग ने ठोस कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत ग्राम गौ सेवक योजना चलाई जा रही है। इसका लाभ लेने को लेकर इच्छुक ग्रामीण को 5 निराश्रित नंदी का संरक्षण अपने गांव में करना है, जिसमें उसे 12 हजार की धनराशि पशुपालन विभाग की ओर से दी जाएगी। योजना से जुड़कर युवा और महिलाएं अपने गांव में रोजगार कर सकती हैं।

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