Uttarakhand

गुरू के प्रति सच्ची निष्ठा, श्रद्धा और विश्वास ही शिष्य की प्रगति का मार्गः महंत विष्णु दास

हरिद्वार,। श्रीगुरू सेवक निवास उछाली आश्रम में श्रीश्री 1008श्री महंत साकेतवासी श्री रामेश्वर दास महाराज की 65वीं पूण्यतिथि श्रद्वापूर्वक मनाई गई। उछाली आश्रम परमाध्यक्ष श्रीमहंत बिष्णुदास जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्वांजलि सभा में संतो-श्रीमहंतो ने साकेतवासी श्रीमहंत रामेश्वरदास जी महाराज के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होने सदैव सनातन धर्म और प्राणी मात्र के कल्याण के लिए कार्य करते रहे। श्रीगुरू सेवक निवास उछाली आश्रम परमाध्यक्ष श्रीमहंत बिष्णु दास महाराज ने कहा कि साकेतवासी श्री रामेश्वर दास महाराज त्याग,तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे। उन्होने सदैव जनकल्याण के कार्याे को आगे रखा। भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत के उत्थान के लिए उनके योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेंगे। कहा कि गुरू के प्रति सच्ची निष्ठा, श्रद्धा और विश्वास ही शिष्य की प्रगति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि श्रद्वेय गुरूजनों से प्राप्त ज्ञान और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए आश्रम की सेवा परंपरा को आगे बढाने का कार्य सतत जारी है। श्रीमहंत दुर्गादास महाराज ने श्रद्वासुमन अर्पित करते हुए साकेतवासी श्रीमहंत रामेश्वरदास महाराज के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे उनके द्वारा तीर्थनगरी में आने वाले श्रद्वालुओं को हरसंभव सहायता प्रदान कराने का प्रयास करते रहे। श्रीरामानंदी आश्रम परमाध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम दास महाराज ने साकेतवासी श्री महंत रामेश्वरदास महाराज को दिव्य महापुरूष बताते हुए कहा कि उन्होने हमेशा सेवा,कार्य संकल्प और त्याग की भावना को सर्वाेपरि रखा। श्रद्वांजलि अर्पित करने वालों में श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज,श्रीमहंत प्रमोद दास जी महाराज,श्रीमहंत प्रहलाद दास जी महाराज,श्रीमहंत जगदीश दास जी महाराज,महंत शंकरदास जी महाराज,महंत घनश्याम दास जी महाराज,पुनीत दास सहित कई अन्य संत शामिल रहे। इस दौरान विभिन्न प्रांतो से आए उनके श्रद्वालु शिष्यों ने भी साकेतवासी श्रीमहंत रामेश्वरदास जी महाराज को श्रद्वा सुमन अर्पित कर आर्शीवाद प्राप्त किए।

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