Uttarakhand

शासन और सार्वजनिक नीति के लिए डेटा-संचालित भविष्य बनाने हेतु हाथ मिलाया

देहरादून,। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी (बीआईपीपी) ने उत्तराखंड सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया, ताकि राज्य में साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण, अनुसंधान और डेटा-संचालित शासन को सुदृढ़ किया जा सके। इस साझेदारी के अंतर्गत, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (सीपीपीजीजी) के लिए एक शोध एवं ज्ञान भागीदार के रूप में कार्य करेगा और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण, निगरानी व मूल्यांकन, डेटा-लिंक्ड शासन, जलवायु अनुकूलता, वन अर्थव्यवस्था, क्षमता निर्माण, नेतृत्व विकास और अनुप्रयुक्त नीति अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में राज्य सरकार की सहायता करेगा।
एमओयू का आदान-प्रदान डॉ. आरुषि जैन, निदेशक, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी और डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव, योजना विभाग, उत्तराखंड सरकार के बीच हुआ। इस दौरान, अनंद बर्धन, मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार उपस्थित रहे। डॉ. जैन के साथ सौभाग्य समल, प्रमुख, साझेदारी, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य प्रमुख राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों में डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई)य नरेंद्र सिंह भंडारी, अतिरिक्त सचिव, योजना, गोयूकेय अन्ना रॉय, प्रमुख आर्थिक सलाहकार (डीएम एंड ए), नीति आयोगय और डॉ. मनोज कुमार पंत, निदेशक, योजना, सेतु आयोग, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस), गोयूके शामिल थे।
इस अवसर पर बोलते हुए, अनंद बर्धन, मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार, ने कहा, उत्तराखंड सरकार सभी विभागों में डेटा-संचालित शासन और साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के साथ यह साझेदारी हमें संस्थागत क्षमता बनाने, डेटा का अधिक प्रभावी उपयोग करने और नवाचारी नीति समाधान विकसित करने में सहायता करेगी, जिससे नागरिकों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित होंगे और विकसित उत्तराखंड/2047 की परिकल्पना को साकार करने में मदद मिलेगी।
एमओयू पर हस्ताक्षर डेटा हार्मोनाइजेशन पर कार्यशाला- डेटा-लिंक्ड गवर्नेंस सिस्टम का निर्माण के साथ-साथ हुआ, जिसे अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) और सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (सीपीपीजीजी), योजना विभाग, उत्तराखंड सरकार ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। इस कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने राज्य में प्रशासनिक डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने और डेटा-लिंक्ड शासन को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ. आरुषि जैन, निदेशक, भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, आईएसबी, ने कहा, ष्जो बात हमें इस सहयोग के बारे में सबसे अधिक उत्साहित करती है, वह यह है कि यह ऐसे समय में हो रही है, जब शासन स्वयं एक गहरे परिवर्तन से गुजर रहा है। अगली सीमा केवल अधिक डेटा एकत्र करना नहीं है, बल्कि उसका बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करके निर्णयों को बेहतर बनाना, क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना और नागरिकों के लिए मापनीय प्रभाव उत्पन्न करना है। उत्तराखंड में श्लर्निंग-इंटेलिजेंट गवर्नेंसश् के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की क्षमता है, जहाँ डेटा, साक्ष्य, मानवीय निर्णय और प्रौद्योगिकी मिलकर सार्वजनिक परिणामों को बेहतर बनाएँ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button