Uttarakhand

उŸारकाशी के रवांई क्षेत्र में दस करोड़ की कृषि मंडी बनी शोपीस

उŸारकाशी,। रंवाई घाटी के किसानों के लिए करीब दस करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई कृषि उत्पादन मंडी समिति आज भी शोपीस बनकर रह गई है। धारी वल्ली में निर्मित अत्याधुनिक मंडी भवन का संचालन शुरू न होने से क्षेत्र के काश्तकारों को अपनी उपज बेचने के लिए आज भी बाहरी मंडियों का रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर विपणन की सुविधा नहीं मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ समय और परिवहन पर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है।
रंवाई घाटी टमाटर समेत कई नकदी फसलों के उत्पादन के लिए प्रदेशभर में पहचान रखती है। हर वर्ष यहां बड़ी मात्रा में टमाटर, शिमला मिर्च, राजमा और अन्य सब्जियों का उत्पादन होता है। इसके बावजूद स्थानीय मंडी के अभाव में किसान अपनी उपज को सड़क किनारे एकत्र कर ट्रकों का इंतजार करने को मजबूर हैं। कई बार पूरा दिन केवल माल लोड कराने में ही निकल जाता है। इस दौरान किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए स्वयं चौकीदारी करनी पड़ती है, जिससे उनका बहुमूल्य समय नष्ट होता है।
स्थानीय मंडी समिति का संचालन शुरू न होने से अधिकांश किसान अपनी उपज बिचौलियों के माध्यम से बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिचौलियों पर निर्भर रहने के कारण उन्हें बाजार का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। यदि नौगांव की मंडी चालू हो जाती तो खेतों से सीधे उपज मंडी तक पहुंचती और वहां से व्यवस्थित तरीके से बाहरी बाजारों में भेजी जाती। इससे किसानों को भारी-भरकम परिवहन खर्च से राहत मिलने के साथ उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होती। किसान काश्तकार नयन सिंह बर्त्वाल, विजय बंधानी और हरिमोहन सिंह का आरोप है कि इस वर्ष उन्हें पूरी उम्मीद थी कि नई मंडी का संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन जनप्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी के चलते अब तक यह संभव नहीं हो सका। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई मंडी का उपयोग न होना सरकारी संसाधनों की अनदेखी का उदाहरण है।
काश्तकार नयन सिंह बर्त्वाल, विजय बंधानी और हरिमोहन सिंह ने कहा कि मंडी के संचालन से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलता और परिवहन पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचता। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान अक्सर सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे उपज समय पर बाहरी मंडियों तक नहीं पहुंच पाती और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। यदि स्थानीय मंडी संचालित होती तो फसल सुरक्षित रखी जा सकती थी और विपणन की प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होती। किसानों ने मंडी का शीघ्र संचालन शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि तैयार होने के बावजूद उसका उपयोग न होना काश्तकारों के साथ अन्याय है।
नौगांव में निर्मित कृषि उत्पादन मंडी समिति के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से समय मिलने पर इस माह के अंत तक मंडी का लोकार्पण कर दिया जाएगा। लोकार्पण के बाद मंडी का विधिवत संचालन शुरू हो जाएगा, जिससे रंवाई घाटी के हजारों किसानों को अपनी उपज के विपणन की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। किसानों और स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि वर्षों के इंतजार के बाद करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह मंडी जल्द ही अस्तित्व में आएगी और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ काश्तकारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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