Uttarakhand

मुनि महाराज की डोली ने मचाया केदारनाथ हाईवे पर तांडव

 

अगस्त्यमुनि,। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर केदारनाथ हाईवे पर अगस्त मुनि महाराज की डोली ने जमकर तांडव मचाया। डोली को मंदिर से रवाना होकर मुनि महाराज के मैदान अगस्त्यमुनि में जाना था, जहां सैकड़ों की संख्या में भक्त डोली का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मैदान का गोल गेट होने से डोली ने अंदर प्रवेश नहीं किया। डोली समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि 15 सालों बाद दिवारा यात्रा का आयोजन किया गया, जिसको लेकर प्रशासन को पहले ही सूचना दी गई थी, मगर प्रशासन ने मामले में कोई ार्यवाही नहीं की। जिस कारण मुनि महाराज को केदारनाथ हाईवे पर आक्रोश दिखाना पड़ा।
वैदिक मंत्रोच्चारण एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना के पश्चात अगस्त्यमुनि स्थित अगस्त्य ऋषि मंदिर से मुनि महाराज की चल विग्रह डोली भक्तों की कुशल-क्षेम पूछने को लेकर दिवारा यात्रा पर निकली। इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु देव दर्शन के लिए पहुंचे। लगभग पनद्रह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अगस्त्यमुनि क्षेत्र के 365 गांवों के आराध्य देव मुनि महाराज की डोली यात्रा अपने प्रथम चरण के लिए मंदिर परिसर से रवाना हुई। डोली के निकलते ही “मुनि महाराज की जय” के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
पहले दिन की यात्रा के दौरान जैसे ही देव डोली अगस्त्य ऋषि सैंड (क्षेत्र) की ओर बढ़ी, भारी संख्या में श्रद्धालु डोली के साथ चल पड़े। हालांकि अगस्त्य क्षेत्र के मुख्य द्वार पर लगे गोल गेट के कारण देव डोली इस मार्ग से प्रवेश नहीं कर सकी। इसके चलते हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं राहगीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एकत्र हो गए।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों ओर लगभग तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया। करीब तीन घंटे तक लगे इस जाम में बारात की गाड़ियां सहित सैकड़ों यात्री फंसे रहे। मरीज को ले जा रही एंबुलेंस भी कई घंटों तक जाम में फंसी रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन की ओर से मौके पर कोई भी उपस्थित नहीं हो पाया और पांच घंटे बाद आखिरकार देव डोली वापस अगस्त ऋषि मंदिर में लौटी। वहीं क्षेत्र में इस तरह की घटना होने पर लोग अशुभ संकेत मान रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चैहान ने कहा कि प्रशासन को पहले ही गोल गेट को तोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन प्रशासन स्तर से कोई कार्यवाही नहीं की गई, जिस कारण डोली ने मैदान में प्रवेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि पांच घंटे तक कोई कार्यवाही नहीं होने से डोली वाली अगस्त ऋषि मंदिर को लौट गई। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के अशुभ संकेत भी मान सकते हैं।

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